- मैं एक मोबाइल फ़ोन हूँ।
- इस आधुनिक तकनीकी युग में मैं एक बहुत ही उपयोगी साधन हूँ।
- बच्चों से लेके बूढ़ों तक सभी के हाथों में मैं हमेशा रहती हूँ।
- मेरे बगैर बच्चे और बड़े एक पल भी नहीं रह सकते।
- लोग मुझे सिर्फ एक दूसरे से बात करने के लिए ही उपयोग नहीं करते बल्कि कई अनेक कामों के लिए भी वे मेरा इस्तेमाल करते है जैसे फोटो और वीडियो निकलने के लिए, गाने सुनने या सिनेमा देखने के लिए आदि।
- मेरे बिना उनका जीवन दुर्भर हो जायेगा। लेकिन मैं ये चाहती हूँ कि लोग मुझे बहुत कम इस्तेमाल करे ताकि उनका सेहद अच्छी रहे।
- मुझे सिर्फ सरूरत होने पर ही इस्तेमाल करना। मेरी लोगों से यही विनती हैं.
Preserving Sanatana Haindava Dharma through temple tourism, traditions and timeless wisdom - Sobha Kalyani.
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